Last Year at Marienbad | The Game of Memory | EkChaupal

Last Year at Marienbad | The Game of Memory | EkChaupal

सखी इस फिल्म के बारे में सबसे पहले निर्मल वर्मा के एक निबंध में पढ़ा था जब उन्होने इसके screenwriter Robbet Grillet से अपने interview के बारे में लिखा था। फिर French New Wave पढ़ने के तहत Allan Resnais के बार में पढ़ा तो और मन हुआ। याद है हम अपने मन के बारे में…

Top Quotes from Agyeya’s Apne Apne Ajnabee | EkChaupal

Top Quotes from Agyeya’s Apne Apne Ajnabee | EkChaupal

अपने अपने अजनबी अज्ञेय का उपन्यास है। ये कुछ पसंदीदा पंक्तियाँ हैं उस किताब से। आपको किताब पसंद आएगी। पढ़िएगा। कुछ भी पूरा नहीं होता। ना जीवन। ना मृत्यु। अज्ञेय का उपन्यास अपने अपने अजनबी अपने आप में बड़ा अनूठा है। शुरू में बड़ी मुश्किल हुई इसके संसार और लोगों के जीवन में उतरने में।…

Three Thousand Years of Longing | Tale of a Story | EkChaupal

Three Thousand Years of Longing | Tale of a Story | EkChaupal

सखी, मैंने ये फिल्म देखी। तुम्हें याद होगा तो मैंने कहा था कि ये सिनेमा हाल में देखुंगा लेकिन फिर देख नहीं पाया। और अब जाकर देखी। सखी हमने बचपन से जादू, परी, जिन्न की कहानियाँ सुनी हैं। ये वही कहानियाँ हैं जिन्होंने हमारे बचपन को इतना सुंदर बनाया था। साथ में ये वही कहानियाँ…

Pablo Neruda’s Top Questions | The Book of Questions

Pablo Neruda’s Top Questions | The Book of Questions

The Book of Questions, Pablo Neruda की किताब है जिसमें उन्होंने 316 poetic सवाल पूछे हैं। अपने में उलझे, अपने में ही सुलझे, ये सवाल कुछ अलग ही कहते हैं। उसी किताब में से कुछ जादुई सवाल यहाँ पेश हैं।

Raah Sangharsh Ki | Love Storiyaan | A Letter | EkChaupal

Raah Sangharsh Ki | Love Storiyaan | A Letter | EkChaupal

साथी, अभी कुछ बहुत सुंदर देखा। Love Storiyaan S01 E04 “राह संघर्ष की..” – Director-  Akshay Indikar । आँखें हल्की नम हैं, खुशी से। भीतर जैसे गर्माहस का एक गोला पिघल रहा है। यह खुशी है कुछ बहुत सुंदर देखने की। और उससे भी ज़्यादा इस बात की कि इसे किसी ने इस दुनिया में…

Awaken The Giant Within | Anthony Robbins | EkChaupal

Awaken The Giant Within | Anthony Robbins | EkChaupal

Awaken The Giant Within by Anthony Robbins. इस किताब के बारे में कहने को बहुत कुछ है लेकिन जो एक बात इसे पढ़ने के बाद बार बार मन में आती रही वो यह थी कि यह किताब जीवन में सारी अच्छी चीज़ों के प्रति – जो हमें पता होती हैं हमेशा से लेकिन हम फ़िर…

Joram | Devashish Makhija | A Letter | EkChaupal

Joram | Devashish Makhija | A Letter | EkChaupal

जोरम देखी। शरीर में सिहरन रही बहुत देर तक जब पिक्चर खतम हो गयी। हम चुप थे। सब के सब हॉल में। लोग बाहर जा रहे थे। लेकिन एक चुप्पी थी सबमें। मैं बैठी रही। मेरा दोस्त मेरे उठने का इंतज़ार कर रहा था। हॉल के एम्प्लॉयीज़ भी। पिक्चर खतम हो चुकी थी।

लेकिन दसरू तो अभी भी भाग रहा था।

Forgetting by Devashish Makhija | Power of Remembrance | EkChaupal

Forgetting by Devashish Makhija | Power of Remembrance | EkChaupal

बचपन से लेकर बूढ़े होने तक हम कितना कुछ भूल जाते हैं, भूल जाएंगे और कितना कुछ याद रहेगा… इन कहानियों के अंत में पहुँचकर लगा कि मैं बूढ़ा हो चुका हूँ और अपनी हाथ की रेखाओं को टटोलकर देख रहा हूँ कि क्या ये बचा रहेगा मेरे पास या फिर forgetting की सतत प्रक्रिया में कहीं खो जाएगा।