Laal Singh Chaddha | An Appreciation | EkChaupal

Laal Singh Chaddha | An Appreciation | EkChaupal

क्यूंकी जहां से मैं देख रहा हूँ – हम आज इस समय ऐसे हैं (जो कुछ भी अच्छा और बुरा है) क्यूंकी हमने कुछ खास कहानियाँ बार बार कही और सुनी हैं। और भविष्य भी बनेगा तो इस बात पर हम कौनसी कहानी सुनने और कहने की इच्छा रखते हैं। तो इस मामले में मुझे Laal Singh Chaddha बहुत पसंद आई है। तुम भी एक बार देख लेना।

Laal Tin Ki Chhat | Nirmal Verma | EkChaupal

Laal Tin Ki Chhat | Nirmal Verma | EkChaupal

रात का एक बज रहा है। मैंने बस अभी निर्मल वर्मा की “लाल टीन की छत” (Laal Tin Ki Chhat) पढ़कर बंद करी है। विश्वास नहीं होता कि यह कहानी खतम हो गयी। मैं कुछ देर चुप बिस्तर पर ही पड़ी रही। किताब मेरी छाती और होठों के बीच किसी पुल सी लेटी हुई थी, मेरे होठों के गीलेपन से उसके किनारे भीग रहे थे और मेरी हर साँस के साथ वो ऊपर और नीचे उठ रही थी। मैं बिस्तर पर पड़ी कुछ देर तक बस गहरी साँसें लेती रही।

SALLY ROONEY | Beautiful World Where Are You | Questions & Their Answers

SALLY ROONEY | Beautiful World Where Are You | Questions & Their Answers

अच्छा उपन्यास है। बहुत अच्छा है। बहुत दिनों बाद कुछ हल्का पढ़ा है। जो बोझिल नहीं लगता। साफ पानी में गोते जैसा। जिसमें बहे जाना अच्छा लग रहा है। उनके पात्र वैसे ही हैं जैसे हम लोग हैं। अपने में उलझे, जीवन से सवाल करते हुए, अच्छे बुरे के बारे में, रोज़मर्रा की politics, दोस्ती, परिवार से जूझते हुए। Career और पैसे की जलन और उलझनों के बीच एक सुंदर संसार का सपना लिए।

John Steinbeck’s Of Mice and Men | Innocence | EkChaupal

John Steinbeck’s Of Mice and Men | Innocence | EkChaupal

बहुत मासूमियत भरी कहानी है Of Mice and Men की। शुरू में पता चल जाता है कि अंत में क्या होगा। पर तब भी पढ़ते गए ये सोचकर कि बदल जाएगा। ठीक यही पात्रों के साथ है। उन्हें पता है कि आगे क्या होगा, पर किसी वजह से वो दूसरी संभावना की आशा में जीते हैं और अंत में हार जाते हैं। यहां तक कि इस बात को स्वीकारते भी हैं।

Badhai Do | First LGBTQ Film of Mainstream Hindi Cinema | EkChaupal

Badhai Do | First LGBTQ Film of Mainstream Hindi Cinema | EkChaupal

लेकिन इसे देखने के बाद लगा कि असल मायनों में तो यह हिंदी मेनस्ट्रीम सिनेमा की पहली lgbtq फ़िल्म है। क्यूँकि यह पहली थी जो सच में उनके के जीवन के बारे में थी। उनकी इच्छाओं, उनकी लड़ाइयों और उनके समझौतों को थोड़ा करीब से देख पाने का एक मौका। उनकी नज़र से।

Everything Everywhere All at Once | What It Means to be Human? | Ekchaupal

Everything Everywhere All at Once | What It Means to be Human? | Ekchaupal

कोई कहता है There are only few specks of time where everything makes sense और मैं इस फ़िल्म को बनाने वालों को शुक्रिया कहती हूँ आँसुओं के बीच। साथी यह फ़िल्म जब अपने अंतिम क्षणों में होती है तो लगता है यह वही सब बातें हैं जो हम जानते हैं हमेशा से सुनते हैं लेकिन फिर भी फिर भी हमें उन्हें फिर से अलग अलग ज़रिए से एक पूरी यात्रा करके दोबारा सुनना ज़रूरी होता है अलग अलग कॉन्टेक्स्ट में जिससे हर बार वही अर्थ किसी नए तरीके से हमें मिलता है… वो क्षण when it all makes sense।

If On A Winter’s Night a Traveller | Italo Calvino

If On A Winter’s Night a Traveller | Italo Calvino

If on a winter’s night a traveler, इटली के Nobel laureate लेखक Italo Calvino का उपन्यास है। ये 1979 में प्रकाशित हुआ था। उपन्यास का English में अनुवाद William Weaver ने किया है। नीचे लिखा विवरण उपन्यास की यात्रा की कहानी है।

Achal Mishra’s Dhuin | Second Letter | Ekchaupal.com

Achal Mishra’s Dhuin | Second Letter | Ekchaupal.com

साथी, अचल मिश्रा की dhuin देखी कल मैंने भी। देखने के बाद जब तुम्हारा पत्र आया (Dhuin | First Letter) तो मेरे आँख के कोने में एक आँसू था शायद। कोई ठीक तभी अँधेरे में मुझे युद्ध की खबर सुना के गया था और मेरे भीतर पंकज का चलना रुका नहीं था। मैंने तुमसे कहा कि समझा नहीं सकती क्या लग रहा है।

Dhuin | Achal Mishra | First Letter | Ekchaupal.com

Dhuin | Achal Mishra | First Letter | Ekchaupal.com

सखी, अचल मिश्रा की dhuin देखी। पहला शब्द। पहला visual और कुछ देर बाद मुझे लगा ये तो मैं हूँ। मैंने पंकज की चुप्पी में खुदके बहुत से हिस्से देखे। बहुत निजी हिस्से। उसके संवाद से ज्यादा उसकी चुप्पी मे मुझे मैं दिखा। और तो और मेरे आस पास के बहुत से लोग दिखे।