Last Year at Marienbad | The Game of Memory | EkChaupal

Last Year at Marienbad | The Game of Memory | EkChaupal

सखी इस फिल्म के बारे में सबसे पहले निर्मल वर्मा के एक निबंध में पढ़ा था जब उन्होने इसके screenwriter Robbet Grillet से अपने interview के बारे में लिखा था। फिर French New Wave पढ़ने के तहत Allan Resnais के बार में पढ़ा तो और मन हुआ। याद है हम अपने मन के बारे में…

Three Thousand Years of Longing | Tale of a Story | EkChaupal

Three Thousand Years of Longing | Tale of a Story | EkChaupal

सखी, मैंने ये फिल्म देखी। तुम्हें याद होगा तो मैंने कहा था कि ये सिनेमा हाल में देखुंगा लेकिन फिर देख नहीं पाया। और अब जाकर देखी। सखी हमने बचपन से जादू, परी, जिन्न की कहानियाँ सुनी हैं। ये वही कहानियाँ हैं जिन्होंने हमारे बचपन को इतना सुंदर बनाया था। साथ में ये वही कहानियाँ…

Raah Sangharsh Ki | Love Storiyaan | A Letter | EkChaupal

Raah Sangharsh Ki | Love Storiyaan | A Letter | EkChaupal

साथी, अभी कुछ बहुत सुंदर देखा। Love Storiyaan S01 E04 “राह संघर्ष की..” – Director-  Akshay Indikar । आँखें हल्की नम हैं, खुशी से। भीतर जैसे गर्माहस का एक गोला पिघल रहा है। यह खुशी है कुछ बहुत सुंदर देखने की। और उससे भी ज़्यादा इस बात की कि इसे किसी ने इस दुनिया में…

Joram | Devashish Makhija | A Letter | EkChaupal

Joram | Devashish Makhija | A Letter | EkChaupal

जोरम देखी। शरीर में सिहरन रही बहुत देर तक जब पिक्चर खतम हो गयी। हम चुप थे। सब के सब हॉल में। लोग बाहर जा रहे थे। लेकिन एक चुप्पी थी सबमें। मैं बैठी रही। मेरा दोस्त मेरे उठने का इंतज़ार कर रहा था। हॉल के एम्प्लॉयीज़ भी। पिक्चर खतम हो चुकी थी।

लेकिन दसरू तो अभी भी भाग रहा था।

Suzume : The Art of Great Storytelling | EkChaupal

Suzume : The Art of Great Storytelling | EkChaupal

This shift from individual to universal is something worth experiencing. It is the key ingredient. This makes the character go Woah! But more than the Suzume, we the people who have identified with her, cheered for her, rooted for her, cried with her, laughed at and with her are suddenly looking with our mouths ajar at what is happening. It makes me shiver, cry and feel goosebumps all over my body.

Notes on TAR | Cate Blanchett | EkChaupal

Notes on TAR | Cate Blanchett | EkChaupal

The whole sequence without any break… the way she carries herself in every frame. Every tone of her body, her voice, her silence… Cate Blanchett disappears… I can literally see nothing of her, yet she is there… where is the technique? Where is the art? The music in her acting… she is the character… she is Tar… and Tar is here…

Laal Singh Chaddha | An Appreciation | EkChaupal

Laal Singh Chaddha | An Appreciation | EkChaupal

क्यूंकी जहां से मैं देख रहा हूँ – हम आज इस समय ऐसे हैं (जो कुछ भी अच्छा और बुरा है) क्यूंकी हमने कुछ खास कहानियाँ बार बार कही और सुनी हैं। और भविष्य भी बनेगा तो इस बात पर हम कौनसी कहानी सुनने और कहने की इच्छा रखते हैं। तो इस मामले में मुझे Laal Singh Chaddha बहुत पसंद आई है। तुम भी एक बार देख लेना।

Badhai Do | First LGBTQ Film of Mainstream Hindi Cinema | EkChaupal

Badhai Do | First LGBTQ Film of Mainstream Hindi Cinema | EkChaupal

लेकिन इसे देखने के बाद लगा कि असल मायनों में तो यह हिंदी मेनस्ट्रीम सिनेमा की पहली lgbtq फ़िल्म है। क्यूँकि यह पहली थी जो सच में उनके के जीवन के बारे में थी। उनकी इच्छाओं, उनकी लड़ाइयों और उनके समझौतों को थोड़ा करीब से देख पाने का एक मौका। उनकी नज़र से।

Everything Everywhere All at Once | What It Means to be Human? | Ekchaupal

Everything Everywhere All at Once | What It Means to be Human? | Ekchaupal

कोई कहता है There are only few specks of time where everything makes sense और मैं इस फ़िल्म को बनाने वालों को शुक्रिया कहती हूँ आँसुओं के बीच। साथी यह फ़िल्म जब अपने अंतिम क्षणों में होती है तो लगता है यह वही सब बातें हैं जो हम जानते हैं हमेशा से सुनते हैं लेकिन फिर भी फिर भी हमें उन्हें फिर से अलग अलग ज़रिए से एक पूरी यात्रा करके दोबारा सुनना ज़रूरी होता है अलग अलग कॉन्टेक्स्ट में जिससे हर बार वही अर्थ किसी नए तरीके से हमें मिलता है… वो क्षण when it all makes sense।

Achal Mishra’s Dhuin | Second Letter | Ekchaupal.com

Achal Mishra’s Dhuin | Second Letter | Ekchaupal.com

साथी, अचल मिश्रा की dhuin देखी कल मैंने भी। देखने के बाद जब तुम्हारा पत्र आया (Dhuin | First Letter) तो मेरे आँख के कोने में एक आँसू था शायद। कोई ठीक तभी अँधेरे में मुझे युद्ध की खबर सुना के गया था और मेरे भीतर पंकज का चलना रुका नहीं था। मैंने तुमसे कहा कि समझा नहीं सकती क्या लग रहा है।