Forgetting by Devashish Makhija | Power of Remembrance | EkChaupal

Forgetting by Devashish Makhija | Power of Remembrance | EkChaupal

बचपन से लेकर बूढ़े होने तक हम कितना कुछ भूल जाते हैं, भूल जाएंगे और कितना कुछ याद रहेगा… इन कहानियों के अंत में पहुँचकर लगा कि मैं बूढ़ा हो चुका हूँ और अपनी हाथ की रेखाओं को टटोलकर देख रहा हूँ कि क्या ये बचा रहेगा मेरे पास या फिर forgetting की सतत प्रक्रिया में कहीं खो जाएगा।

Pereira Maintains – Antonio Tabucchi | A Small Story | EkChaupal

Pereira Maintains – Antonio Tabucchi | A Small Story | EkChaupal

और फिर एक दिन अचानक पेरिएरा के मन में मृत्यु का खयाल आता है। वो एक नौजवान लड़के को अपने असिस्टेंट की नौकरी पर रखता है। उस लड़के ने मृत्यु की पढ़ाई की थी और उसका काम था कि वो मशहूर साहित्यकारों और लेखकों के लिए एडवांस में श्रद्धांजलियाँ लिखकर दे ताकि जब वो अचानक से मरें तो अगले दिन अखबार में छापने के लिए उनके पास श्रद्धांजलियाँ पहले से ही तैयार हो। इससे उनका अखबार बाकी अखबारों से श्रद्धांजलियाँ देने में आगे रहेगा।

Blindness by Jose Saramago | Stark Whiteness | EkChaupal

Blindness by Jose Saramago | Stark Whiteness | EkChaupal

Jose Saramango के उपन्यास Blindness में जैसे ही सब अंधे एक जगह इकट्ठे होते हैं और जानते हैं कि सारे नियम जिसमें वो शुरू से रहते आए हैं पीछे छूट गए हैं, सबके भीतर का सच बाहर आता है। अंधे हैं तो सब अंधे हैं। कोई किसी को नहीं देख सकता। कोई किसी का सच नहीं छू सकता। जब देखे जाने का डर हट जाता है तब हर कोई समाज और सभ्यता के नियम किनारे कर देता है। यहाँ तक के इंसान होने के जितने नियम हैं सब किनारे हो जाते हैं।

Stoner | John Williams Touching Existentialism Subtly | EkChaupal

Stoner | John Williams Touching Existentialism Subtly | EkChaupal

उनका नाम William Stoner था। देखा जाए तो उन्होंने कोई महान काम नहीं किया बस अपने प्रेम को पूरा करने में जीवन लगा दिया। उनके पूरे indifference के बीच कहीं बहुत कोमल प्रेम है जिसे वो हमेशा बचा कर रख लेना चाहते थे। कैसे होते हैं वो लोग जो कुछ नहीं कहते, बस सहते रहते हैं, उन्हें हार से फरक नहीं पड़ता और जीत चाहिए नहीं वो बस जीना चाहते हैं? क्या मैं Stoner को छू सकता हूँ। मैं उनका जीवन अपने शरीर पर ओढ़ लेना चाहता हूँ। उन्होंने जो नहीं कहा और जो भी जिया सब।

Laal Singh Chaddha | An Appreciation | EkChaupal

Laal Singh Chaddha | An Appreciation | EkChaupal

क्यूंकी जहां से मैं देख रहा हूँ – हम आज इस समय ऐसे हैं (जो कुछ भी अच्छा और बुरा है) क्यूंकी हमने कुछ खास कहानियाँ बार बार कही और सुनी हैं। और भविष्य भी बनेगा तो इस बात पर हम कौनसी कहानी सुनने और कहने की इच्छा रखते हैं। तो इस मामले में मुझे Laal Singh Chaddha बहुत पसंद आई है। तुम भी एक बार देख लेना।

Laal Tin Ki Chhat | Nirmal Verma | EkChaupal

Laal Tin Ki Chhat | Nirmal Verma | EkChaupal

रात का एक बज रहा है। मैंने बस अभी निर्मल वर्मा की “लाल टीन की छत” (Laal Tin Ki Chhat) पढ़कर बंद करी है। विश्वास नहीं होता कि यह कहानी खतम हो गयी। मैं कुछ देर चुप बिस्तर पर ही पड़ी रही। किताब मेरी छाती और होठों के बीच किसी पुल सी लेटी हुई थी, मेरे होठों के गीलेपन से उसके किनारे भीग रहे थे और मेरी हर साँस के साथ वो ऊपर और नीचे उठ रही थी। मैं बिस्तर पर पड़ी कुछ देर तक बस गहरी साँसें लेती रही।