Badhai Do | First LGBTQ Film of Mainstream Hindi Cinema | EkChaupal

Badhai Do | First LGBTQ Film of Mainstream Hindi Cinema | EkChaupal

लेकिन इसे देखने के बाद लगा कि असल मायनों में तो यह हिंदी मेनस्ट्रीम सिनेमा की पहली lgbtq फ़िल्म है। क्यूँकि यह पहली थी जो सच में उनके के जीवन के बारे में थी। उनकी इच्छाओं, उनकी लड़ाइयों और उनके समझौतों को थोड़ा करीब से देख पाने का एक मौका। उनकी नज़र से।

Everything Everywhere All at Once | What It Means to be Human? | Ekchaupal

Everything Everywhere All at Once | What It Means to be Human? | Ekchaupal

कोई कहता है There are only few specks of time where everything makes sense और मैं इस फ़िल्म को बनाने वालों को शुक्रिया कहती हूँ आँसुओं के बीच। साथी यह फ़िल्म जब अपने अंतिम क्षणों में होती है तो लगता है यह वही सब बातें हैं जो हम जानते हैं हमेशा से सुनते हैं लेकिन फिर भी फिर भी हमें उन्हें फिर से अलग अलग ज़रिए से एक पूरी यात्रा करके दोबारा सुनना ज़रूरी होता है अलग अलग कॉन्टेक्स्ट में जिससे हर बार वही अर्थ किसी नए तरीके से हमें मिलता है… वो क्षण when it all makes sense।

Achal Mishra’s Dhuin | Second Letter | Ekchaupal.com

Achal Mishra’s Dhuin | Second Letter | Ekchaupal.com

साथी, अचल मिश्रा की dhuin देखी कल मैंने भी। देखने के बाद जब तुम्हारा पत्र आया (Dhuin | First Letter) तो मेरे आँख के कोने में एक आँसू था शायद। कोई ठीक तभी अँधेरे में मुझे युद्ध की खबर सुना के गया था और मेरे भीतर पंकज का चलना रुका नहीं था। मैंने तुमसे कहा कि समझा नहीं सकती क्या लग रहा है।

Gehraiyaan : दुनिया का सबसे बूढ़ा भूत!

Gehraiyaan : दुनिया का सबसे बूढ़ा भूत!

साथी,

कल रात गहराइयाँ देखी शकुन बत्रा की। फ़िल्म देखने के बाद गहराइयाँ शब्द से रिश्ता बदल गया। गहराइयाँ कहते हुए मन में कितनी ही परतें खुलती हैं भीतर और कितनी फ़िर भी छूट जाती अनछुई। ठीक ऐसी ही है अलीशा। कहानी जिसके इर्द गिर्द घूमती है। शायद अब तक का सबसे सुंदर किरदार शकुन का। दीपिका ने इसे जितने करीब से जिया है वो बता पाना मुश्किल है।

The Great Indian Kitchen | The Cinematic Slap | EkChaupal

The Great Indian Kitchen | The Cinematic Slap | EkChaupal

इस फ़िल्म का यह नाम इसीलिए इतना सटीक है। किसी तमाचे सा। लेकिन तमाचा वो जिसे हम पूरी भीड़ में बहुत अकेले कहीं.. घर की दीवारों जैसी सुरक्षा में महसूस करते हैं। जिसकी आवाज़ किसी को सुनाई नहीं देती हमारे सिवा। और इस तमाचे में कोई हिंसा का भाव भी नहीं होता उलटा यह हमें हमारी उन सारी हिंसाओं का एहसास कराता है जो कभी किसी को नहीं दिखीं.. छुपा दीं गयीं एक असहज मुस्कान के पीछे उन औरतों के द्वारा जो हमारे “The Great Indian Kitchen” में खाना पकाती, बर्तन माँझती, मर्दों की झूठन साफ़ करती पाई जाती हैं। वो औरतें  जो अशुद्ध होती हैं। जिनके दिखने से, छू जाने से नाराज़ रहते हैं भगवान और गुस्सा होते हैं असली मर्द।

निर्मल वर्मा के बहाने – एक लेख

निर्मल वर्मा के बहाने – एक लेख

क्या हम कभी भी वैसा लिख पाते हैं जो हमने लिखने से पहले सोचा था कि हम ऐसा लिखेंगे? आखिर हमारा असल लेखन कौन सा होता है – जो हम सोचते वक़्त लिखते हैं या जो हम लिखते वक़्त सच में लिखते हैं? पर इस सवाल का यह जवाब कितना सही है कि असल में दोनों ही अपने अपने समय(क्षणों) का सत्य होते हैं और क्यूँकि सत्य क्षणिक होता है इसलिए दोनों ही अपने होने में पूरे और जीवित होते हैं उस वक़्त।

The Truman Show | Running From Eternity

The Truman Show | Running From Eternity

मन काफी समय से किसी अस्थिर अणु की भाँति इधर उधर फुदक रहा था.. बहुत समय से कुछ अच्छा पढ़ा या देखा नहीं था। पढ़ने के अनुकूल वातावरण था नहीं तो कुछ देखने का निश्चय किया। “The Truman Show” देखनी है यह यह बात दिमाग में चिपकी पड़ी थी तो बैठ गई देखने। मुख्य किरदार “Jim Carrey” निभा रहे हैं इस बात से वाकिफ़ थी। इनको “The Mask” और “Liar Liar” जैसी बेहतरीन हास्य फिल्मों में देखा था पहले। यह फ़िल्म 1998 में आई थी और इसे देखने के बाद बस एक ही बात मन में आयी की यह फ़िल्म सच में जीवन में मरने से पहले एक बार तो देख ही लेनी चाहिए।

निठल्ले की डायरी – हरिशंकर परसाई | निठल्ले – निठल्ले में फ़र्क है!

निठल्ले की डायरी – हरिशंकर परसाई | निठल्ले – निठल्ले में फ़र्क है!

जब तक पुरुष नारी को यह ना बता दे कि मैं जंगली जानवर भी हूँ, तब तक वह समझता है कि मेरी पूरी शख्सियत नहीं उभरी।

Margarita With A Straw | If life is a Margarita, how will you drink it?

Margarita With A Straw | If life is a Margarita, how will you drink it?

इस फ़िल्म में मेरी तीन सबसे प्रिय अभिनेत्रियाँ हैं जिन्होंने बहुत अहम किरदार निभाए हैं- Kalki Keochlin, Sayani Gupta, Revathi. कहानी Laila(Kalki) की ज़िंदगी की है जो कि Cerebral Palsy से ग्रसित है। उसके परिवार में उसके पिता, उसकी माँ(Revathi) और उसका भाई भी है। Laila दिल्ली में college पढ़ती है, उसे music बहुत पसंद है और वो अपने college के music band में lyricist का काम भी करती है।